Sunday, June 16, 2019

Insaniyat dikhayo Insaniyat bachayo

     ""Insaniyat dikhayo insaniyat bachayo""


"Beti bachayo beti padhayo"  oops did i made some mistake aah it should be "Insaniyat dikhayo Insaniyat bachayo"  

Twinkle sharma a 4 year old girl brutually gang raped and mudered by humans yess its correct "HUMANS" the most dangerous species on earth now a days.....

नन्ही नन्ही आँखें तो बड़े बड़े उसके सपने थे
एक हाथ मे चॉकलेट तो दूसरा हाथ पकड़े उसके अपने थे।..
गले मे वाटर बोत्तल तो कन्धों पे टँगा भारी सा बस्ता था
थक जाती थी बेचारी क्योंकि छोटे से पैरो के लिए काफी लंबा रस्ता  था।..
देख के उसको थक्का हारा माँ ने भी अपना सारा दर्द भुलाया
और अपनी नन्ही सी जान को अपनी गोद मे उठाया
गोद मे उठाया उससे चुनरी से खिलाया
नज़र न लग जाये कह के उसे काला धागा भी पहनाया
माँ की वो जान थी
तो पिता का अभिमान थी
माँ की वो जान थी तो पिता का अभिमान थी
खुदा की तरफ से 100 परियो का बलिदान थी।..
जैसे जैसे स्कूल नज़दीक आया वो घबराने लगी
औरो की तरह वो भी पेट दर्द के बहाने बनाने लगी,,
देख के उसको घबराता माँ ने उसे फिर से हँसाया
बस अभी ले जायउँगी वाले जाल में फिरसे था फसाया।..
जैसे ही स्कूल नज़दीक आया तो आँखें उसकी बड़ी हो गयी
जैसे ही माँ ने गोद से उतारा तो माँ की उंगली पकड़ स्कूल के बाहर ही खड़ी हो गयी
जैसे तैसे करके माँ ने उसे स्कूल भेजा
बाहर से तो मुस्कुरा रही थी लेकिन अंदर से काँप रहा था उसका भी कलेजा।..
स्कूल के अंदर जाते ही उसे कुछ इंसान मिले
इंसानो का मखोटा पहने हैवान मिले
वो   जिसने  हैवानियत कहना अभी सीखा भी नही था
वो   जिसके लिए हर हर इंसान ही सही था
उसको उन हैवानो ने कमरे में बुलाया
कमरे में बुलाया उससे खूब डराया
इन्सानियत का क़त्ल करने के लिए उसके अँगों को सहलाया
वो रोना चाहती थी भागना चाहती थी
मगर इन दरिंदो के सामने उसका ज़ोर चल न पाया।..
जैसे ही उन हैवानो ने उसके मुँह से हाथ हटाया
वो खूब रोई, खूब चिल्लाई
इतना दर्द दिया हैवानो ने की उसकी रूह तक बिल्बिलाई।..
इन सब से भी जब उनकी हवस खत्म ना हुई
तो उन्होंने उस नन्ही सी जान को खूब मारा खूब पीटा
बाल पकड़ के था उसको घसीटा
लड़की के नाम पे उन्होंने खूब दी उसे गाली
देख के उसको रोता उसकी आँखे तक निकाल डाली।..
बस अब सारे शरीर से खून बह रहा था
एक बेकसूर इंसान एक लड़की होंने की सजा सह रहा था।..
बस अब वो अपना होश खो रही थी
बिना किसी गलती के खून के आंसू रो रही थी
सोच रही थी बेचारी आखिर क्यों  उसकी माँ उसे काला धागा था पहनाया,,
वक़्त आने पर जो उसकी रक्षा भी न कर पाया।..
उतार के काला धागा उसने अपने हाथ मे पकड़ लिया
एक कली को फूल बनने से पहले ही उन हैवानो ने जंजीरो में जकड़ दिया।..
एक हाथ मे धागा तो दूसरे हाथ से बनाई उसने मुट्ठी थी
ऐसा दर्द दिया इंसानो ने की उस खुदा तक कि रूह काँप उठी थी।..
देख के उसको यमराज भी बोल उठे
ये जरूर किसी हैवान का काम है,,
शैतान का नही इंसान का काम है
ऐसा काम तो शैतान भी नही करते
इंसान के नाम से शैतान तो यूँही बदनाम है।..
देख के अपनी बेटी की ये हालत माँ से भी रुक ना पाया
उसी चुनरी से उसका बदन ढक रही थी
जिससे सुबह था उसको खिलाया
निकाल के उसका काला धागा दूर मार फेंका
आखिर कसूर क्या था मेरी बेटी का गुस्से से खुदा की तरफ देखा।..
 देख ये सब खुदा भी शर्मसार हुआ था,
क्योंकि इस बार द्रोपती का चीरहरण नही
बल्कि उस भगवान की ही बनाई इंसानियत का बलातकार हुआ था
इंसानियत का बलात्कार हुआ था
इंसानियत का बलात्कार हुआ था..............                                                        
                                                              #nobita


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